UPDATE CHANDAULI NEWS: चंदौली में चौथी मुहर्रम की मजलिस में अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ा। बताया गया कि जनाबे ज़ैनब ने दुनिया तक पहुंचाया करबला का पैगाम।
करबला की दास्तान
मौलाना ने अपने बयान में इमाम हुसैन और उनकी बहन जनाबे ज़ैनब पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि जनाबे ज़ैनब न होतीं तो करबला की कहानी दुनिया तक इस रूप में नहीं पहुंच पाती। इमाम हुसैन की शहादत के बाद उन्होंने अत्याचारी बादशाह यज़ीद के दरबार में निर्भीक होकर प्रतिरोध किया और दुनिया को बताया कि इस्लाम का असली संदेश इंसाफ, सत्य और मानवता है।
उन्होंने कहा कि जनाबे ज़ैनब ने अपने धैर्य, साहस और अदम्य हौसले से यह साबित कर दिया कि सच्चाई को कभी दबाया नहीं जा सकता। करबला की दास्तां आज भी हर उस इंसान को शक्ति देती है जो अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना चाहता है।
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करबला का संदेश लोगों के दिलों में जिंदा
मौलाना जाफ़र रिज़वी ने इमाम हुसैन के जिगरी दोस्त हज़रत हबीब इब्ने मज़ाहिर का भी उल्लेख किया और कहा कि करबला की जंग रिश्तों और वफादारी की सबसे बड़ी मिसाल है। इमाम के सच्चे साथियों ने न केवल अपनी जान बल्कि अपने जवान बेटों तक को दीन और इंसानियत की रक्षा के लिए कुर्बान कर दिया। यही कारण है कि करबला का संदेश सदियों बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा है।
चौथी मुहर्रम की मजलिस
चौथी मुहर्रम की मजलिस में बनारस से आई अंजुमन सज्जादिया पठानी टोला, बनारस के अलावा अंजुमन अब्बासिया मक़दूमाबाद, लौंदा और सिकंदरपुर की अंजुमनों के मातमी दस्तों ने नौहाख्वानी और मातम के जरिए इमाम हुसैन की शहादत को खिराजे अकीदत पेश किया। मातमी धुनों और "या हुसैन" की सदाओं से पूरा माहौल गमगीन और रूहानी हो उठा।
डॉ0 एस0जी0 इमाम ने दी खास जानकारी
अज़ाखाने के प्रबंधक डॉ0 एस0जी0 इमाम ने बताया कि पांचवीं मुहर्रम को अलम और ताबूत का जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें जिले के अलावा बाहर से आने वाली विभिन्न अंजुमनें भी शिरकत करेंगी। उन्होंने सभी अकीदतमंदों से कार्यक्रम में शामिल होकर करबला के पैगाम को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की।
इस दौरान पेशख्वानी करने वालों में मायल चंदौलवी, वकार सुल्तानपुरी, शहंशाह मिर्जापुरी, मोनिस, हाजी नूरूल, सिब्बल साहब प्रमुख रहे। इस दौरान लौंदा, डिग्घी, ऐंलहीं समेत नगर के अजादार बड़ी तादाद में उपस्थित रहे।





