UPDATE CHANDAULI NEWS: चंदौली में मुहर्रम की पांचवी मजलिस में अलम और ताबूत निकाला गया। अजादारों ने चूमकर दुआएं मांगी। वहीं पिता और पुत्र के प्रेम और शहादत की कहानी पर अज़ादार फूट फूटकर रोए।
इमाम हुसैन के अट्ठारह साल के बेटे अली अकबर जब यजीद की सेना से जंग करने निकले तो इमाम करबला के रेगिस्तान में उनके घोड़े के पीछे देर तक चलते रहे। अली अकबर ने जब पूछा कि बाबा आप ऐसा क्यों कर रहे हैं इमाम हुसैन ने कहा कि काश तुम्हारी भी औलाद होती तो इसका मतलब समझते। मौलाना जाफ़र रिज्वी ने आदर्श पुत्र और पिता की कहानी सुनाकर अज़ादारों को रूला दिया। मौलाना ने अली अकबर की शहादत को शब्दों से दृश्य में बदल दिया जिससे मजलिस में बैठे अजादार बेचैन हो गए।
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मुहर्रम की पांचवी मजलिस
मुहर्रम की पांचवी मजलिस में आज अलम और ताबूत निकाला गया। अज़ादारों ने अलम और ताबूत को चूमकर दुआएं मागीं और इमाम हुसैन की अजीमुश्शान कुर्बानी को अपनी खिराजे अकीदत पेश की। उन्होंने कहा कि इमाम के बेटे अली अकबर समेत एक एक व्यक्ति ने मुसीबत के वक्त जुटकर और अपने प्राणों का बलिदान देकर साबित किया कि इंसानी रिश्ते असल में कैसे होने चाहिए।
इस्लाम के मकसद पर प्रकाश
मौलाना इस्लाम के मकसद पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाईचारा और देशप्रेम इस्लाम की शिक्षाओं का प्रमुख अंग है। रसूले पाक का कहना था कि अपने दुश्मन से भी इतना झुककर मिलो की वो दुश्मनी भूलकर गले मिल जाए। उन्होंने रसूल हदीस और कुरान शरीफ की आयतों के जरिए बताया कि वैमनस्यता फैलाना कभी भी इस्लाम का हिस्सा नहीं रहा, जो लोग समाज को बांटने का काम करते हैं वो किसी भी सूरत में सच्चे मुसलमान नहीं हो सकते। उन्होंने अपनी हदीस के जरिए ये भी कहा कि रसूले पाक ने हमेशा देश प्रेम की वकालत की इसलिए अपने मुल्क से मुहब्बत करना हर मुसलमान का फर्ज है। इस दौरान देश में अमन के लिए भी दुआ की गई।
अज़ादार रोने को हुए मजबूर
जनाबे अली अकबर के ताबूत की अज्मत बयान करते हुए मौलाना ने बताया कि जनाबे अली अकबर इमाम हुसैन के बेटे थे और उनकी शक्ल मुहम्मद साहब से इतनी ज्यादा मिलती थी कि उन्हें शबीहे पयंबर कहा जाता था। करबला के मैदान में उन्हें बरछी भोंककर मार डाला गया। बनारस से आई अंजुमन जव्वादिया, पीतरकुंडा ने अपने मातमी नौहों से अजादारों को रोने के लिए मजबूर कर दिया।
इसके बाद कटेसर से आई अंजुमन सदा ए हक और अंजुमन अब्बासिया सिकंदरपुर ने भी अपने पुरखुलूस नौहों से अजादारों की आंखें नम कर दीं। इस दौरान वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, सिंकदरपुर, डिग्घी, लौंदा समेत नगर के तमाम अज़ादार बड़ी संख्या में मौजूद रहे।





