UPDATE CHANDAULI NEWS: चंदौली के युवा अशिवक्ता शिवम उपाध्याय के अनुसार IGRS की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर पारदर्शिता से ही न्याय मिल सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित आईजीआरएस (Integrated Grievance Redressal System) का उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। यह व्यवस्था शासन और जनता के बीच विश्वास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। किंतु पिछले कुछ वर्षों में यह अनुभव सामने आया है कि अनेक मामलों में शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। यदि किसी शिकायत का वास्तविक समाधान नहीं होता, तो ऐसी व्यवस्था की उपयोगिता और विश्वसनीयता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
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संख्या कम नही, IGRS का मूल कारण हो समाप्त
आज आवश्यकता केवल शिकायतों की संख्या कम करने की नहीं, बल्कि शिकायतों के मूल कारणों को समाप्त करने की है। कई बार देखा जाता है कि संबंधित विभाग केवल निर्धारित समय-सीमा के भीतर निस्तारण दिखाने के उद्देश्य से शिकायत का निष्पादन कर देता है, जबकि शिकायतकर्ता की समस्या यथावत बनी रहती है। कई मामलों में शिकायतकर्ता से कोई संवाद तक नहीं किया जाता और विभागीय रिपोर्ट के आधार पर शिकायत का निस्तारण कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है, बल्कि नागरिकों के विश्वास को भी कमजोर करती है।
सिर्फ कागज़ी कार्यवाही ?
यदि किसी शिकायत का समाधान बिना स्थल निरीक्षण, बिना तथ्यात्मक जांच और बिना शिकायतकर्ता का पक्ष सुने कर दिया जाता है, तो वह वास्तविक निस्तारण नहीं बल्कि केवल कागजी कार्रवाई है। ऐसी प्रवृत्ति से शासन की मंशा पर नहीं, बल्कि व्यवस्था के क्रियान्वयन पर प्रश्न उठते हैं। सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक ईमानदारी से पहुंचे।
IGRS को ऐसे बनाये प्रभावी
आईजीआरएस (IGRS) प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक निस्तारण के साथ स्पष्ट साक्ष्य संलग्न किए जाएं। यदि किसी निर्माण कार्य, सफाई, अतिक्रमण हटाने अथवा अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का दावा किया गया है, तो उसके फोटो, वीडियो या अन्य प्रमाण भी उपलब्ध कराए जाएं। इससे शिकायतकर्ता को भी विश्वास होगा कि वास्तव में कार्य हुआ है और उच्च अधिकारी भी निस्तारण की गुणवत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन कर सकेंगे।
एक्शन बेहद जरूरी
इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता की संतुष्टि को भी निस्तारण का महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए। यदि शिकायतकर्ता यह कहता है कि उसकी समस्या अभी भी बनी हुई है, तो मामले की स्वतंत्र पुनः जांच कराई जानी चाहिए। केवल विभागीय रिपोर्ट के आधार पर शिकायत बंद कर देना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। जवाबदेही तभी सुनिश्चित होगी जब गलत अथवा भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भी उचित कार्रवाई की व्यवस्था हो।
सुशासन को मजबूत करना उद्देश्य
तकनीक का उद्देश्य केवल डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि सुशासन को मजबूत करना है। आईजीआरएस जैसी व्यवस्था तभी सफल होगी जब उसमें पारदर्शिता, निष्पक्षता, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व समान रूप से दिखाई देंगे। प्रत्येक शिकायत के पीछे किसी नागरिक की वास्तविक समस्या, अपेक्षा और अधिकार जुड़ा होता है। इसलिए उसका समाधान भी उसी गंभीरता से किया जाना चाहिए।
जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है। यदि नागरिकों को यह अनुभव होने लगे कि उनकी शिकायत केवल कागजों में निस्तारित हो रही है, तो वे ऐसी व्यवस्था से विमुख होने लगेंगे। इसलिए समय की मांग है कि आईजीआरएस को केवल शिकायत निस्तारण का मंच न मानकर जनविश्वास का मंच बनाया जाए। पारदर्शी जांच, शिकायतकर्ता की सहभागिता, उत्तरदायी प्रशासन और वास्तविक समाधान ही आईजीआरएस की विश्वसनीयता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। यही सुशासन की पहचान है और यही एक सशक्त, संवेदनशील तथा जवाबदेह प्रशासन की वास्तविक कसौटी भी है।






