UPDATE CHANDAULI NEWS: चंदौली में मौलाना जाफ़र रिज़वी ने बताया कि हिंसा और आतंक के लिए इस्लाम में कोई जगह नहीं है। पड़ोसी तक को ठेस न पहुंचे ऐसा हो मुसलमानों का आचरण।
मुहर्रम के अवसर पर आयोजित मजलिस में इस्लाम के शांति, इंसानियत और सद्भाव के संदेश को प्रमुखता से रखते हुए मौलाना जाफ़र अली रिज़वी ने कहा कि इस्लाम कभी भी हिंसा, आतंक और नफरत की शिक्षा नहीं देता। उन्होंने कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा का स्पष्ट संदेश है कि मुसलमान का आचरण इतना उत्तम होना चाहिए कि उसके पड़ोसी तक को उसकी वजह से किसी प्रकार की तकलीफ या ठेस न पहुंचे।
मुहर्रम पर आयोजित मजलिस
मौलाना ने कहा कि आज दुनिया को सबसे ज्यादा जरूरत इंसानियत, आपसी सम्मान और भाईचारे की है। इस्लाम का वास्तविक स्वरूप प्रेम, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की पहचान उनके अच्छे व्यवहार, सच्चाई, ईमानदारी और मानव सेवा से होनी चाहिए, न कि कट्टरता या किसी प्रकार की हिंसा से। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग आतंक और हिंसा का रास्ता अपनाते हैं, उनका इस्लाम की मूल शिक्षाओं से कोई संबंध नहीं है।
मौलाना जाफ़र अली रिज़वी ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का महीना नहीं बल्कि यह इंसानियत, सब्र, त्याग और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का महीना है। कर्बला का संदेश किसी एक मजहब या समुदाय के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए है। इमाम हुसैन (अ.) ने अपने परिवार और साथियों के साथ जो कुर्बानी दी, वह सत्य, न्याय और इंसानी मूल्यों की रक्षा के लिए थी। उनका पैगाम आज भी पूरी दुनिया के लिए मशाल-ए-राह है।
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कर्बला के दर्दनाक वाकये का जिक्र
मजलिस में मौलाना ने कर्बला के दर्दनाक वाकये का जिक्र करते हुए इमाम हुसैन की लाडली बेटी जनाबे सकीना के मसायब बयान किए। उन्होंने बताया कि किस तरह कमसिन सकीना ने कर्बला से लेकर शाम तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया। मसायब का बयान सुनकर मजलिस में मौजूद अज़ादारों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल गम और अकीदत से भर उठा।
इस अवसर पर सिकंदपुर की अंजुमन अब्बासिया के नन्हें अज़ादारों ने बेहद भावपूर्ण अंदाज में नौहाख्वानी और मातम कर इमाम हुसैन की बारगाह में पुरसा पेश किया। बच्चों की अकीदत और उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। ऐंलहीं से आई अंजुमन गुलजारे पंजतनी और डिग्गी की अंजुमन ने भी नौहाख्वानी और सीनाजनी के जरिए मसायबी नौहे पेश किए।
मजलिस में मायल चंदौलवी, वकार सुल्तानपुरी, शाहिद बनारसी और ताबिश ने पेशख्वानी कर रूहानी माहौल को और भी असरदार बना दिया। बड़ी संख्या में अज़ादारों ने मजलिस में शिरकत की और शोहदाए कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया।
अंत में देश और प्रदेश में अमन, शांति, भाईचारे और इंसानियत की सलामती के लिए विशेष दुआ की गई नफीस, सलमान, फैजान, सुड्डू, मोहम्मद रजा, वसीम भाई, शाहिद बनारसी, मोहम्मद वैस, मोहम्मद वासिफ, आसिफ, रेयाज राइन, हसन मेंहदी, अज्मी, बज्मी इत्यादि बड़ी तादाद में उपस्थित रहे।





