UPDATE CHANDAULI NEWS: चंदौली में गुरुवार को मजलिसों का दौर जारी रहा। अंजुमनों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया।
इमाम हुसैन का जिक्र और मजलिसों का मकसद इस्लाम की सही तस्वीर दुनिया के सामने पेश करने की कोशिश है। आज मुसलमान फ़िरक़ों में बंट कर ख़ुद आगे आ गया और इस्लामी तालीम कहीं पीछे छूट गई है। अल्लाह ने फ़िरक़ा परस्ती की क़ुरआन में सिर्फ़ बुराई नहीं की बल्कि इसे गुनाहे अज़ीम क़रार दिया। जब-जब इन इस्लामिक सिद्धांतों में दरार आई रसूल के दामाद हजरत अली और उनके बाद उनके नवासे इमाम हुसैन ने इसके खिलाफ़ युद्ध किया। करबला की जंग में इस्लामिक सिद्धांतों के लिए थी और इसमें इमाम हुसैन को जीत मिली। यजीद का नाम मिट गया जबकि हुसैन आज भी हर दिल में जिंदा है। मौलाना जाफ़र रिज्वी ने दूसरे मुहर्रम की तकरीर के दौरान अज़ादारों को बताया कि कैसे इस्लाम का मूल भाव उदारता है न कि कट्टरता। इस दौरान अंजुमन के संचालकों को मुहर्रम के प्रतीक चिन्ह भेंटकर उनकी हौसला अफजाई की गई।
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अज़ाखाना-ए-रजा में जारी मजलिसों के दौर
अज़ाखाना-ए-रजा में जारी मजलिसों के दौर में बृहस्पतिवार को मौलाना समेत मायल चंदौलवी, वकार सुल्तानपुरी, शहंशाह मिर्जापुरी समेत अलग-अलग शाायरों और पेशख्वानों ने अपने उन्वान पेश किए। उन्होंने कहा कि रसूलल्लाह की सारी तालीम सारा अमल इंसानियत बचाने के लिए था। इंसानियत के उसूलों का नाम इस्लाम है। और इंसानी उसूल की ताक़त इंसानों की एकजुटता से ही उभर कर सामने आती है। रसूल ने अपनी रिसालत के ज़रिये लोगों को एक साथ खड़ा किया तो बाद में मुसलमान दुनियां की लालच में आ कर फ़िरको में बटते चले गए और आज भी यह सिलसिला जारी है। लोग अपने फ़िरको को ले कर फ़ख्र करते हैं जबकि यह अफ़सोस की बात है।
कुर्बानी की दास्तां
इमाम हुसैन की कुर्बानी की दास्तां बयान करते हुए मौलाना ने कहा कि ऐसा नहीं था कि इमाम हुसैन अपने साथ एक बड़ी फ़ौज नहीं ला सकते थे, जब वह मक्का से चले तो हजारों लोग उनके साथ थे, मगर इमाम हुसैन ने हर मंज़िल पर उन्हें आगाह किया कि, मैं किसी हुकूमत के लिए नहीं जा रहा हूँ मैं इस्लाम की हिफ़ाज़त में अपनी जान देने जा रहा हूँ, जो इसके लिए अपनी गर्दन कटा सकता है वह मेरे साथ चले। किसी अच्छे मक़सद के लिए जान देना आसान बात नहीं होती तो लोग कटते गये और कर्बला में इस्लाम को बचाने के लिए सिर्फ़ बहत्तर लोग ही नज़र आये।
इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत
अज़ाखाने रज़ा में इस मौके पर दुल्हीपुर से आई अंजुमन यादगारे हुसैनी ने अपना कदीमी मातम पेश कर इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की। अजाखाने के प्रबंधक डा0 सैयद गजन्फर इमाम ने बताया कि मुहर्रम की पांच तारीख को अजाखाना-ए-रज़ा अलम और ताबूत में जूलूस निकलेगा जिसमें सभी धर्मों के लोग शिरकत करेंगे।
मजलिस के दौरान इब्ने हसन, इंसाफ़, इरशाद भाई, सरवर भाई, वसीम अहमद, इमरान परवेज़, लाडले, आसिफ़, राजू टाइगर, तमसीर मिल्की, मोहम्मद इंसान, रियाज़ राईन, दानिश, वकार सुल्तानपुरी, सैयद अली इमाम, मायल चंदौलवी, काशिफ, जीशान हैदर इत्यादि मौजूद रहे।





