UPDATE CHANDAULI NEWS: चंदौली में पारा 40 से 42 डिग्री सेल्यिस के बीच। हीटवेव के मद्देनजर डीएम ने आवश्यक दिशा निर्देश दिया है।
अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार ने पत्र के माध्यम से अवगत कराया है कि जनपद में इस समय में पारा 40 से 42 डिग्री सेल्यिस के बीच है। जिस कारण भीषण गर्म हवा व लू के प्रकोप से बचाव के लिए संबंधित विभागों को जिलाधिकारी द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया है।
चंदौली में हीट वेव
डीएम ने बताया है कि भीषण गर्मी, गर्म हवा व लू से अपना बचाव कैसे करे तथा सुरक्षित कैसे रहे। गर्म हवाओं से बचने के लिए खिड़की को रिफ्लेक्टर जैसे एलुमिनियम पन्नी, गत्ते इत्यादि से ढककर रखे। ताकि बाहर की गर्मी को अंदर आने से रोका जा सके। उन खिड़कियों व दरवाजों पर जिन से दोपहर के समय गर्म हवाए आती है, काले पर्दे लगाकर रखना चाहिए। स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान को सुने और आगामी तापमान में होने वाले परिवर्तन के प्रति सजग रहें।
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आपात स्थिति में करें ये काम
आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लें। बच्चों तथा पालतू जानवरों को कभी भी बन्द वाहन में अकेला न छोड़ें। जहां तक संभव हो, घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। सतुलित हल्का व नियमित भोजन करें और बासी खाने का प्रयोग कदापि न करें। मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर से बाहर अपने शरीर और सिर को कपड़े या टोपी से ढककर रखे। घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी. छाछ, वेल का शर्बत, नमक चीनी का घोल, नीबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करे।
क्या है मौसम विभाग का पूर्वानुमान ?
मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार मार्च से जून के बीच अधिक ताप मान रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को हीटवेव से बचाव के लिए आवश्यक तैयारियां कर लेनी चाहिए। हीतवेव से बचाव को लेकर जन सामान्य के बीच जागरूता अभियान स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा है। जब वातावरण का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से 3-4 डिग्री अधिक पहुंच जाता है, तो उसे हीटवेव या लू कहते हैं। अभी आगे गर्मी का प्रकोप और बढ़ेगा इसलिए गर्मी से बचाव के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना चाहिए।
कब लगती है लू ?
गर्मी में शरीर के द्रव्य बॉडी पल्यूड सूखने लगते है। शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग पुरानी बीमारी, मोटापा, पार्किंसन रोग, अधिक उम्र अनियत्रित मधुमेह वाले व्यक्तियों को लू से विशेष बचाव करने की जरूरत है। इसके अलावा डॉययूरेटिक एटीस्टिमिनक, मानसिक रोग की औषधि का उपयोग करने वाले व्यक्ति भी लू से स सावधान रहें।
क्या है लू के लक्षण ?
गर्म, लाल, शुष्कत्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना उल्टे श्वास गति में तेजी व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी का होना या चक्कर आना, मूत्र न होना अथवा इसमें कमी आदि मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर के उच्च तापमान से आआंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। इससे शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न हो जाता है।
जनपद में हीटवेव (लू) के प्रति जोखिम (कमजोर वर्ग एवं क्षेत्र की पहचान)
05 वर्ष से कम आयु के बच्चे व 65 वर्ष से ज्यादा के व्यक्ति।
गर्भवती महिलायें।
ऐसे व्यक्ति जो की सैन्य, कृषि, निर्माण और औद्योगिक व्यवसाय में श्रमिक मजदूर खिलाडी आदि हों।
शारीरिक तौर पर कमजोर व्यक्ति एव मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति।
त्वचा संबन्धित रोग जैसे सोरायसिस पायोडर्मा आदि से प्रभावित व्यक्ति।
पर्यावरण बदलने के कारण गर्मी के अनुकूलनता का आभाव।
सोने का आभाव।
आपदा संबंधी सहायता नंबर
एम्बुलेस 108, पुलिस-112, राहत आयुक्त कार्यालय 1070 टोल फ्री, जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेन्टर चंदौली कंट्रोल रूम- 05412-262100, 1077 टोल फ्री नंबर।
क्या करे और क्या न करें
रेडियो सुनिए, टीवी देखिए, स्थानीय मौसम समाचार के लिए समाचार पत्र पढ़ें। पर्याप्त पानी पिये-भले ही प्यास न लगे। खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), लस्सी तोरानी (चावल का पानी), नीबू का पानी, छाछ आदि जैसे घरेलू पेय का इस्तेमाल करें। हल्के वजन, हल्के रंग के, ढीले, सूती कपडे पहनें। अपना सिर ढंककर कपड़ें, टोपी या छतरी का उपयोग करें। हाथों को साबुन और पानी से बार-बार धोएं। अनावश्यक घर से बाहर समय 12:00 से 3.00 बजे तक न निकले। बहुत ही आवश्यक होने पर चेहरे व सिर को ढक कर ही निकले।
नियोक्ता और श्रमिक
कार्यस्थल के पास ठंडा पेयजल उपलब्ध कराएं। कार्यकर्ताओं को सीधे धूप से बचने को कहे। अति पारिश्रमिक वाले कार्यों को दिन के ठण्डे समय मे निर्धारित करें। बाहरी गतिविधियों के लिए ब्रेक की आवृत्ति में वृद्धि करे। गर्भवती महिलाओं और श्रमिकों जिन्हें चिकित्सा देख-भाल की अचानक जरुरत हो उनका अतिरिक्त ध्यान दिया जाना चाहिए।
वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों के लिये
तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हो, तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें। ध्यान रहे कि उनके पास फोन हो। यदि वे गर्मी से बैचेनी महसूस कर रहे हो 'तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें। उन्हें अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखने के लिए कहें।
शिशुओं के लिये
उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं। शिशुओं में गर्मी की वजह से होने वाली बीमारियों का पता लगाना सीखें। यदि बच्चों के पेशाब का रंग हरा है, तो इसका मतलब है कि यह डिहाईड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हैं। बच्चों को बिना देख रेख खड़ी गाडी में छोड़ कर न जाए, वाहन जल्दी गर्म होकर खतरनाक तापमान पैदा कर सकते हैं।
पशुओं के लिए
जहां तक संभव हो, तेज गर्मी के दौरान उन्हें घर के भीतर रखें। यदि उन्हे घर के भीतर रखा जाना संभव न हो तो उन्हें किसी छाया दार स्थान में रखे, जहां वे आराम कर सकें। ध्यान रखें कि जहां उन्हें रखा गया हो यहा दिन भर छाया रहे। जानवरों को किसी बंद में न रखें, क्यों कि गर्म मौसम में इन्हें जल्दी गर्मी लगने लगती है। ध्यान रखें कि आपके जानवर पूरी तरह साफ हों। उन्हें ताजा पीने का पानी दे, पानी को धूप में न रखे। दिन के समय उनके पानी में बर्फ के टुकडे डालें। पीने के पानी के दो बर्तन रखें ताकि एक मे पानी खत्म होने पर दूसरे से वे पानी पी सके। अपने पालतू जानवर का खाना धूप में न रखें। किसी भी स्थिति में जानवर को वाहन में न छोड़ें।
अन्य सावधानियां
जितना हो सके घर के अंदर रहें। अपने घर को ठंडा रखें। पर्दै, शटर या धूप का उपयोग करें और खिड़कियां खुली रखें। निचली मंजिलों पर रहने का प्रयास करें। पंखे का प्रयोग करें, कपड़ों को नम करें और ठंडे पानी में स्नान करें। यदि आप बेहोश या कम जोरी महसूस करते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए। जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पीने के लिए भरपूर पानी दें।


