UPDATE CHANDAULI NEWS: नई व्यवस्था लागू होने से पहले आवेदन, जांच रिपोर्ट भी समय से तैयार, अब आवेदक को भुगतना पड़ रहा विभागीय देरी का खामियाजा।
जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए समय से आवेदन करने के बावजूद विभागीय प्रक्रिया में हुई देरी का खामियाजा अब आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर, जनपद चंदौली में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें आवेदक द्वारा 09 सितंबर 2026 को नियमानुसार आवेदन किया गया था।
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जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में देरी क्यों ?
आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के तहत उप जिलाधिकारी कार्यालय से नगर पालिका परिषद को जांच के लिए भेजा गया। नगर पालिका परिषद पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर द्वारा जांच पूरी करते हुए 30 सितंबर 2026 को जांच आख्या संबंधित कार्यालय को भेज दी गई। हालांकि, 01 अक्टूबर 2026 से जन्म प्रमाण पत्र के विलंबित पंजीकरण से संबंधित प्रक्रिया में परिवर्तन होने के कारण अब संबंधित कार्यालय द्वारा पूर्व में किए गए आवेदन पर प्रमाण पत्र जारी करने में असमर्थता जताई जा रही है।
क्या कहना है आवेदक का ?
आवेदक पक्ष का कहना है कि उसने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नई व्यवस्था लागू होने से लगभग तीन सप्ताह पहले ही आवेदन कर दिया था। इसके बाद आवेदन के निस्तारण में जो समय लगा, वह आवेदक के नियंत्रण से बाहर था। ऐसे में विभागीय प्रक्रिया में हुई देरी का दायित्व आवेदक पर डालना उसके लिए गंभीर परेशानी का कारण बन रहा है।
मामले में एडवोकेट का हस्तक्षेप
मामले को लेकर शिवम उपाध्याय एडवोकेट, जनपद चंदौली ने भारत के महारजिस्ट्रार (Registrar General of India) को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। शिकायत में अनुरोध किया गया है कि नई व्यवस्था लागू होने से पूर्व किए गए आवेदनों के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि ऐसे मामलों में आवेदकों को दोबारा पूरी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
क्या कहते है शिवम ?
शिवम उपाध्याय एडवोकेट का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है। यदि आवेदन की तारीख पर लागू प्रक्रिया के अनुसार नागरिकों द्वारा समय से आवेदन कर दिया गया है और बाद में विभागीय जांच अथवा पत्राचार में विलंब होता है, तो उसका प्रतिकूल प्रभाव आम नागरिक पर नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी निर्धारित कर विभागीय स्तर पर हुई अनावश्यक देरी की जांच की जाए तथा पात्र आवेदनों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन एवं भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय इस मामले को किस रूप में संज्ञान लेते हैं और पुराने आवेदनों को लेकर आम नागरिकों की इस समस्या के समाधान के लिए क्या स्पष्ट व्यवस्था जारी की जाती है।



