UPDATE CHANDAULI NEWS: चंदौली के अजाखाना-ए-रजा में 8 वीं मुहर्रम को दुलदुल और अलम निकाला गया। मौके पर उमड़े सभी धर्मों के लोग।
"इसकी ख्वाहिश हजरते शब्बीर ने की थी तभी, फख्र है हमको कि हम रहते हैं हिंदुस्तान में"। आठवीं मुहर्रम को अज़ाख़ाने रज़ा में अपने खूसूसी अंदाज में शायरों ने इस्लाम के जरिए देश और हिंदुस्तानी एकता की शान में कसीदे पेश किए। मौलाना जाफर रिज्वी ने अपनी तकरीर में कहा कि इमाम हुसैन यजीद से लड़ाई नहीं करना चाहते थे उन्होंने उसे पैगाम दिया था कि वो उन्हें जाने दे वो शांतिप्रिय देश हिंदुस्तान जाना चाहते हैं। मौलाना ने इस मौके पर दुलदुल की कहानी पढ़ते हुए कहा कि करबला की जंग सिर्फ इंसानों की भूमिका नहीं थी, बेजुबान जानवरों ने भी इमाम हुसैन के साथ मिलकर इस लड़ाई में अपना बेशकीमती योगदान दिया।
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8 वीं मुहर्रम को दुलदुल और अलम
दुलदुल इमाम हुसैन के घोड़े का नाम था जिसने जंग में आखिर तक इमाम के साथ लड़ाई लड़ी और इमाम के शहीद होने के बाद सबसे पहले उनके खेमे में जाकर उनके न होने की सूचना दी। जब दुलदुल इमाम की शहादत के बाद खेमेगाह में पहुंचा तो उसके शरीर पर सैकड़ों तीर थे और उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। तब से हर साल मुहर्रम में दुलदुल का जूलूस निकलता है जिसके जरिए इमाम के बेजुबान साथी को याद किया जाता है।
मुहर्रम इमाम हुसैन के आदर्शों पर चलने का नाम
मौलाना ने ये भी कहा मुहर्रम इमाम हुसैन के आदर्शों पर चलने का नाम है। मुहर्रम हर साल ये संदेश देता है कि समाज को तोड़ने वाले तत्वों के खिलाफ़ अगर खड़ा होना पड़े तो खड़ा होना चाहिए। बिना हिचके और बिना डरे। आठवीं मुहर्रम को मौलाना इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास के मसायब पढ़े। हजरत अब्बास इमाम हुसैन की सेना के कमांडर थे हजारों की फौज को अकेले संभालने में सक्षम थे लेकिन इमाम हुसैन ने दीन बचाने के लिए अपने भाई की कुर्बानी पेश की। मुहर्रम का अलम हजरत अब्बास की वीरता का प्रतीक होता है।
इस दौरान बनासर से आई मशहूर अंजुमन अंसारे हुसैनी रसूलपुरा ने अपने नौहों से अजादारों को रूलाया। जिले की प्रसिद्ध अंजुमन गुलजारे पंजतनी ऐंलहीं के सदस्यों ने अलम और दुलदुल के साथ अजाखाने में भ्रमण किया और अपने खास अंदाज में नौहाजनी और सीनाजनी कीं। अंजुमन अब्बासिया के सदस्यों ने जनाबे अब्बास की शान में नौहा पढ़ते हुए अपने कलाम पेश किए। चंदौली की मशहूर अंजमुन जव्वादिया मकदूमाबाद लौंदा ने सबसे अपने इमाम को खिराजे अकीदत पेश करते हुए एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए।
आठवीं मजलिस के जूलूस में जिले के अलावा बनारस, मिर्जापुर, गाजीपुर, दुलहीपुर, ऐंलहीं के अजादार बड़ी संख्या में जुटे और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद कर पुरनम आंखों से उनकी शहादत को सलाम किया। इस दौरान मायल चंदौलवी, सादिक, रियाज, अनवर, मोमम्मद इंसाफ, सरफराज पहलवान, वकार सुल्तानपुरी, शहंशाह मिर्जापुरी, हसन मिर्जापुरी, अली इमाम, डाक्टर गजन्फर इमाम, सरवर भाई, परवेज लाडले, आसिफ इकबाल, राजू टाइगर, पपलू भाई, मोहम्मद रजा सिकंदरपुरी इत्यादि मौजूद रहे।





